बवासीर

Discussion in 'बवासीर (Hemorrhoids)' started by admin, Jul 11, 2018.

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    स्नेहा आयुर्वेद ग्रुप
    बवासीर ( 2 तरीके कीहोती है अंदरुनी और बाहरी। अंदर की पाइल्स में मस्से दिखाई नहीं देते पर बाहरी में मस्से गुदा से बाहर की और निकलेहोते है। इस रोग में जब मल त्यागते वक़्त खून निकलता है तो उसे खूनी बवासीर कहते है। ये खून इतना अधिक होता है की रोगी इसे देख कर घबरा जाता है। बाहरीबवासीर होने पर मस्से सूज कर मोटे हो जाते है जिससे इसमें दर्द, जलन और खुजली भी होने लगती है। इस लेख में हम जानेंगे
    बवासीर का उपचार
    उपचार:
    पहला प्रयोगः
    डेढ़-दो कागजी नींबू का रस एनिमा के साधन से गुदा में लें। दस-पन्द्रह संकोचन करके थोड़ी देर लेटे रहें, बाद में शौच जायें। यह प्रयोग चार-पाँच दिन में एक बारकरें। तीन बार के प्रयोग से ही बवासीर में लाभ होता है।साथ स्नेहा समूहमें“अच्युताय हरिओम हरड़ चूर्ण”अथवा बाल हरड़ (छोटी हरड़) के 2 से 5 ग्राम चूर्ण का नित्य सेवन करने तथा अर्श (बवासीर) पर अरण्डी का तेल लगाते रहने से बहुत लाभ होता है।
    दूसरा प्रयोगः
    बड़ी इन्द्रफला की जड़ को छाया में सुखाकर अथवाकनेर की जड़ को पानी में घिसकर बवासीर पर लगाने से लाभ होता है
    ।तीसरा प्रयोगः
    “अच्युताय हरिओम नीम का तेल” मस्सों पर लगाने से एवं 4-5 बूँद रोज पीने से लाभ होता है
    ।चौथा प्रयोगः
    सूरन (जमीकंद) को उबाल कर एवं सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। यह चूर्ण 32 तोला, चित्रक 16 तोला, सोंठ 4 तोला, काली मिर्च 2 तोला, गुड़ 108 तोला इन सबको मिलाकर छोटे-छोटे बेर जैसी गालियाँ बना लें। इसे सूरनवटक कहते हैं। ऐसी 3-3 गोलियाँ सुबह-शाम खाने से अर्श (बवासीर) में लाभ होता है
    ।पाँचवाँ प्रयोगः
    करीब दो लीटर ताजी छाछ लेकर उसमें 50 ग्राम जीरा पीसकर एवं थोड़ा-सा नमक मिला दें। जब भी पानी पीने की प्यास लगे तब पानी की जगह पर यह छाछ पी लें। पूरे दिन पानी के बदले में यह छाछ ही पियें। चार दिन तक यह प्रयोग करें। मस्से ठीक हो जायेंगे। चार दिन के बदले सात दिन प्रयोग जारी रखें तो अच्छा है
    ।छठा प्रयोगः
    छाछ में सोंठ का चूर्ण, सेंधा नमक, पिसा जीरा व जरा-सी हींग डालकर सेवन करने सेबवासीर में लाभ होता है।
    सातवाँ प्रयोग :
    रात में 100 gram किशमिश पानी में फूलने के लिए छोड़ दें. और फिर सुबह में जिस पानी में किशमिशको फुलाया है, उसी पानी में किशमिश को मसलकर खाएँ. कुछ दिनों तक लगातार इसका उपयोग करनाबवासीर में अत्यंत लाभ करता है
    .आठवाँ प्रयोग:
    आम की गुठली के अंदर के भाग, और जामुन की गुठली के अंदर के भाग को सूखा लें.फिर इन दोनों का चूर बना लें. औरफिर इस चूर को एक चम्मच हल्के गर्म पानी या मट्ठे के साथकुछ दिन तक नियमित पिएँ. यह आपको लाभ पहुंचाएगा.नौवाँ प्रयोग :
    हर दिन 8-10 ग्लास पानी पीना सुरु कर दे
    .विशेष :-
    ” अच्युताय हरिओम हिंगादी चूर्ण “सभी प्रकार की बवासीर मे चमत्कारिक लाभ पहुचाता हैं
    .बवासीर में क्या खाये
    :1* करेले का रस, लस्सी, पानी
    ।2* दलिया, दही चावल, मूंग दाल की खिचड़ी, देशी घी
    ।3* खाना खाने के बाद अमरुद खाना भी फायदेमंद है
    ।4* फलों में केला, कच्चा नारियल,आंवला, अंजीर, अनार, पपीता खाये
    ।5* सब्जियों में पालक, गाजर, चुकंदर, टमाटर, तुरई, जिमीकंद, मूली खाये
    ।बवासीर में परहेज क्या करे:
    बवासीर का उपचार में जितना जरुरी ये जानना है की क्या खायेउससे जादा जरुरी इस बात की जानकारी होना है की क्या नहीं खाये
    ।1* तेज मिर्च मसालेदार चटपटे खाने से परहेज करे।
    2* मांस मछली, उडद की दाल, बासी खाना, खटाई ना खाएं।
    3* डिब्बा बंद भोजन, आलू, बैंगन।
    4* शराब, तम्बाकू
    ।5* जादा चाय और कॉफ़ी के सेवन से भी बचे।
    बवासीर से बचने के उपाय
    :दोस्तों बहुत से लोग इस बीमारी से प्रभावित है पर हम कुछ बातोंका ध्यान रख कर इससे बच सकते है।
    1* खाने पिने की बुरी आदतों से परहेज करे जैसे धूम्रपान और शराब।
    2* खाने में मसालेदार और तेज मिर्च वाली चीजें न खाये
    ।3* पेट से जुडी बीमारियों से बचे।
    4* कब्ज़ की समस्या बवासीर का प्रमुख कारण है इसलिए शरीर में कब्ज़ न होने दे
    ।5* गर्मियों के मौसम में दोपहर को पानी की टंकी का पानी गरम हो जाता है, ऐसे पानी से गुदा को धोने से बचे।स्नेहा समूह
     

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