मिर्गी :-

Discussion in 'High Blood Pressure | उच्च रक्तचाप' started by ajayj, Jul 6, 2018.

  1. ajayj

    ajayj Member

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    शारीरिक तथा मानसिक रुप से कमजोर व्यक्ति को मिर्गी अधिकांश रुप से आती है अत्यधिक शराब पीना अत्यधिक शारीरिक श्रम सिर में चोट लगने से यह रोग लगता है इस रोग में अचानक से दौरा पड़ता है और रोगी गिर पड़ता है हाथ पैर गर्दन अकड़ जाती है पलके एक जगह रुक जाती है रोगी हाथ पैर अटकता है जी पकड़ जाने से बोली नहीं निकलती मुंह से पीला झाग निकलता है दांत किटकिटाना और और शरीर में कपकपी होना सामान्य रूप से देखा जाता है इस तरह पूनम रोगी को जब जोश आता है तब थका हुआ होता है इसके घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं

    दौरा पड़ने पर रोगी को दाएं करवट ली जाएं जिससे उसके मुंह से सभी झाग आसानी से निकल बल्कि दौरे के समय अमोनिया या चुन्ने की गंध सुघानी चाहिए जिससे उसकी बेहोशी दूर हो


    एक चम्मच ब्राह्मी बूटी के रस में अलका सेंधा नमक मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो बार पिलाएं

    20 ग्राम शंखपुष्पी का रस और 2 ग्राम सोंठ का चूर्ण शहद के साथ मिलाकर खिलाएं

    नीम के कोमल पत्तियां अजवाइन और काला नमक इन सब को पानी में पीसकर पेस्ट बनाकर सेवन करें

    शरीफा के पत्तों के रस की कुछ बूंदें रोगी के नाक में डालने से जल्दी होश आ जाता है

    नींबू के रस में हींग मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है

    आक की जड़ का पाउडर बकरी के दूध में घोलकर रोगी को सुंघाए

    तुलसी के चार पांच पत्ते कुचलकर उस में कपूर मिलाकर रोगी को सुंघाए

    प्याज का रस पानी में घोलकर पिलाने से भी काफी आराम मिलता है

    मेहंदी के पत्तों का रस दूध में मिलाकर पिलाने से काफी लाभ होता है

    पुराना देसी गाय का घी या पंचगव्य नाशिका धृत प्रतिदिन सुबह शाम 2 2 बुंन्द नाक में डालने से यह रोग कुछ ही महीनों में हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है

    देशी गौमुत्र के नियमित सेवन से सर्वरोग नाश होता है

    देशी गाय के दूध में देशी गाय का घी या दालचीनी पाउडर या अश्वगंधा डालकर पीने से शारिरिक दुर्बलता दूर होती है

    पथरी की शिकायत न हो तो गेहुँ के दाने के बराबर चुना नियमित सेवन दूध छोड़कर किसी भी तरल पेय के साथ करनी चाहिए इससे वात व कफ के असंतुलन से होने वाले 70 रोग नष्ट होते हैं

    भाई राजीवदीक्षित जी के ज्ञानानुसार ( स्वदेशी चिकित्सा पुस्तक संग्रह 4 से)

    सभी रोगों पर विजय प्राप्त करने हेतु भाई राजीवदीक्षित जी के द्वारा बताये गए आयुर्वेद के यम नियम का पालन अवश्य करे 'परहेज ही सर्वोत्तम इलाज है"

    निरोगी रहने हेतु महामन्त्र

    मन्त्र 1 :-
    • भोजन व पानी के सेवन प्राकृतिक नियमानुसार करें
    • ‎रिफाइन्ड नमक,रिफाइन्ड तेल,रिफाइन्ड शक्कर (चीनी) व रिफाइन्ड आटा ( मैदा ) का सेवन न करें
    • ‎विकारों को पनपने न दें (काम,क्रोध, लोभ,मोह,इर्ष्या,)
    • ‎वेगो को न रोकें ( मल,मुत्र,प्यास,जंभाई, हंसी,अश्रु,वीर्य,अपानवायु, भूख,छींक,डकार,वमन,नींद,)
    • ‎एल्मुनियम बर्तन का उपयोग न करें ( मिट्टी के सर्वोत्तम)
    • ‎मोटे अनाज व छिलके वाली दालों का अत्यद्धिक सेवन करें
    • ‎भगवान में श्रद्धा व विश्वास रखें

    मन्त्र 2 :-
    • पथ्य भोजन ही करें ( जंक फूड न खाएं)
    • ‎भोजन को पचने दें ( भोजन करते समय पानी न पीयें एक या दो घुट भोजन के बाद जरूर पिये व डेढ़ घण्टे बाद पानी जरूर पिये)
    • ‎सुबह उठेते ही 2 से 3 गिलास गुनगुने पानी का सेवन कर शौच क्रिया को जाये
    • ‎ठंडा पानी बर्फ के पानी का सेवन न करें
    • ‎पानी हमेशा बैठ कर घुट घुट कर पिये
    • ‎बार बार भोजन न करें आर्थत एक भोजन पूणतः पचने के बाद ही दूसरा भोजन करें

    आयुर्वेद में आरोग्य जीवन हेतु 7000 सूत्र हैं आप सब सिर्फ इन सूत्रों का पालन कर 7 से 10 दिन में हुए बदलाव को महसूस कर अपने अनुभव को अपने जानकारों तक पहुचाये
    स्वस्थ व समृद्ध भारत निर्माण हेतु

    आपका अनुज
    गोविन्द शरण प्रसाद
    वन्देमातरम

    Dr वेद प्रकाश जी के ज्ञानानुसार होमओपैथी द्वारा

    इसमे रोगी अचानक बेहोश हो जाता है। जहाँ और जैसी भी हालत में हो गिर पड़ता है। मुँह से झाग आने लगती है। हाथ - पैर अकड़ जाते हैं और जबड़ा भिंच जाता है।

    ● आत्म ग्लानि (प्यार में धोखा), भय, शोक के कारण रोग - (इग्नेशिया 200 या 1M)

    ● त्वचा रोग दब जाने के कारण। दौरे से पहले छाती व पेट मे तनाव । दौरा पड़ने पर ज़बान कट जाती है। सिर एक तरफ को झुक जाता, पेशाब निकल जाता है। पानी पीने से रोग में आराम - (कॉस्टिकम 30, दिन में 3 बार)

    ● रोग की लहर घुटनों से उंगलियों व अंगूठो से उठे और फिर पेट के निचले हिस्से तक जाए। रोगी अचानक दौरा पड़ने के कारण चीख के साथ गिर पड़ता है और दौरे के बाद सो जाता है -(क्युप्रम मैट 30, दिन में 3 बार)

    ● जब दौरे नींद के दौरान आए। रोग की लहर नाभि के आस पास से शुरू हो। पूर्णिमा को या उसके आस पास दौरे आए - (साइलीशिया 1M, 15 - 20 दिन में एक बार)

    ● मोटे लोगों में भय के कारण दौरे जो कि पूर्णिमा के आस पास आए। रोग की लहर नाभि के आस पास से ऊपर उठे और ऐंठन बढ़ती जाये। पानी पीने से रोग बढ़े। दौरे रात के समय ज्यादा आये - (कैलकेरिया कार्ब 1M, 15-20 दिन में एक बार)

    ● हस्त मैथुन या ज्यादा वीर्यह्रास के कारण दौरे। रोग की लहर नाभि के आसपास से शुरू हो, रोगी बेहोश हो जाये - ( ब्यूफो राना 30 या 200, दिन में 2 बार)

    ● जब दौरा सुबह के समय हर 2-3 सफ्ताह बाद आए - ( सीपिया 200 या 1M, 10-15 दिन में एक बार)

    ● बच्चों में जब किसी खास रोग के दब जाने से इस रोग की शुरुआत हो। उत्तेजना से रोग बढ़े - (बेलाडोना 30, दिन में 3 बार)

    ● जब दौरे अचानक और जल्दी जल्दी आये। किसी भी मामूली कारण (भय, आतंक, हस्तमैथुन आदि) से दौरे पड़ने लगे - (आर्टिमिसिया वल्गेरिस Q या 6, दिन में 3 बार)

    ● जब शरीर अचानक अकड़ जाए और अंग फड़कने लगे और इसके बाद काफी कमजोरी आ जाये, जबड़े अकड़ जाये - (साइक्युटा विरोसा 6 या 30, दिन में 3 बार)

    ● चिड़चिड़े, तुनक मिजाज रोगी जो अक्सर कब्ज से पीड़ित हो - (नक्स वोमिका 30, दिन में 3 बार)

    विशेष चिकित्सीय सलाह हेतु आप व्यक्तिगत रात्रि 9 बजे के बाद सम्पर्क कर सकते हैं
     

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